🚩🔱 ❄ «ॐ»«ॐ»«ॐ» ❄ 🔱🚩

※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※
  🌹🌟 राधे नाम संग हरि बोल 🌟🌹
 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※

  🌹🔱 💠 भक्ति ⚜ सुधा 💠 🔱🌹

【 गत ब्लॉग से आगे 】

🌹 इष्टदेव की उपासना :

पुरा जालन्धरं देत्यं ममापि परिकम्पनम्।
पादांगुष्ठाग्ररेखोत्यं चक्रं कृत्वा हरोऽहरत्।।
तच्च चक्रं मया लब्धं नेत्रार्चनाद्विभोः।
एतत्सुदर्शनाख्यं वै दैत्यचक्रप्रमर्दनम्।।
तन्मया तव रक्षार्थ भूतविद्रावणं परम्।
तावत्प्रणुन्नं पुरतस्ततश्चाहमिहागतः।।
काशीमिदानीं यास्यामि विश्वैश्वरविलोकने।।
प्रपंचको्रश्वाय सीमानं प्राप्य देवो जनार्दनः।
वैनतेयादवारुह्य करे धृत्वा ध्रुवं ततः।।
मणिकर्ण्या परिस्नाय विश्वेशमभिपूज्य च ।
ध्रुवं बभाषे भगवान् हितं तस्य चिकीर्षयन्।।
लिंग स्थापय यत्नेन क्षेत्रेऽत्रैवाविमुक्तके।
त्रैलोक्यस्थापनं पुष्यं यथा भवति तेऽक्षयम्।।

अर्थात ‘‘हे ध्रुव ! तुम महामति हो। सावधान होकर सूनो। मैं तुम्हारे हित की बात कहता हूँ, जिससे तुम्हारा स्थान अत्यन्त अचल हो जायगा। मौक्षदाता साक्षात् भगवान् श्रीविश्वनाथजी जहाँ निवास करते हैं, उस परम पवित्र काशीपुरी को मैं जाना चाहता हूँ। जिस काशी में स्वयं श्रीविश्वेश्वर भगवान् मृत प्राणियों के कान में उस मंत्र का उपदेश करते हैं, जिससे उन प्राणियों के समस्त कर्म नष्ट हो जाते हैं। सभी तरह के उपद्रवों को देने वाले इस तुच्छ संसाररूपी दुःख को दूर करने का यह आनन्द-भूति काशी ही एकमात्र उपाय है। दुःखरूपी महान् वृक्ष का बीज विषयों में समीचीनता-असमीचीनता-बुद्धि है।

【 शेष आगे के ब्लॉग में 】

 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※
 🌹۞☀∥ राधेकृष्ण: शरणम् ∥☀۞🌹
 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※

  🌹 कृष्णा श्री राधाप्रेमी 🌹         
 https://www.facebook.com/shriradhapremi/

🌹 प्रियभगवद्जन... धार्मिक पोस्ट पाने या हमारे सत्संग में सामिल होने के लिए हमें श्री "राधे राधे"... शेयर करें 💐
 : मोबाइल नम्बर .9009290042 :

※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※

टिप्पणियाँ