🚩🔱 ❄ «ॐ»«ॐ»«ॐ» ❄ 🔱🚩

※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※
  🌹🌟 राधे नाम संग हरि बोल 🌟🌹
 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※

  🌹🔱 💠 भक्ति ⚜ सुधा 💠 🔱🌹

【 गत ब्लॉग से आगे 】

🌹 इष्टदेव की उपासना :

एक दूसरे पर अनन्य प्रीति करने वाले दो मालिकों के नौकर यदि एक दूसरे के स्वामी की निन्दा करें तो वे दोनों जैसे स्वामिद्रोही ही कहे जाते हैं वैसे ही एक-दूसरे के आत्मा और एक-दूसरे के ध्यान में निमग्न माधव श्रीविष्णु और उमा-धव श्री शिव की निन्दा करने वाले स्वामिद्रोही ही हैं। कोई जिज्ञासु ऐसा प्रश्न कर सकता है कि भगवान शिव, विष्णु, राम, कृष्ण आदि देवताओं मे से किसकी उपासना करनी चाहिए? कोई किसी को निकृष्ट, तो कोई किसी को बड़ा बतलाता है। ऐसी स्थिति में बुद्धि व्याकुल हो जाती है। इसका यही उत्तर हो सकता है। कि भगवान के विचित्र प्रपंच में विचित्र स्वभाव के जीवों का निवास है। इसीलिए भीभगवान भिन्न स्वभाव वाले जीवों की विभिन्न रुचियों का अनुसरण करके विभिन्न रूप में प्रकट होते हैं। किसी का चित्त भगवान के किसी रूप में खिंचता है, किसी का किसी में। वेद-पुराणादि शास्त्रों में सर्वोत्कृष्ट रूप से प्रतिपादित सभी रूप भगवान के ही हैं। अतः जिस रूप में प्रीति हो, उसी रूप की उपासना करनी चाहिए।

अनभिज्ञ लोग एक ही निन्दा और दूसरे रूप की प्रशंसा करते हैं, अभिज्ञ तो सभी रूपों में अपने प्रभु को ही देखकर सन्तुष्ट होते हैं। जैसे कोई व्यक्ति अनेक विद्याओं में निपुण होने के कारण अपने अनेक वेष और नामों से अनेक कार्य करता हो, भिन्न-भिन्न कार्यार्थी पृथक् वेष और नाम वाले रूप के अनुरागी हों और उसे ही सर्वोत्कृष्ट समझने लगें। दूसरे लोग दूसरे वेष और नामवाले रूप के अनुरागी हों। उनमें कुछ लोग किसी रूप के प्रशंसक हों और कुछ किसी के निन्दक हों, इसलिए परस्पर युद्ध होने लगे, वहाँ जो लोग वस्तु-स्थिति को जानने वाले होंगे तो वे दोनों की विवादी दलों की मूर्खता पर परिहास करेंगे, क्योंकि वे दोनों ही वेषों में एक ही तत्व को देखते हैं। योगवासिष्ठ के विपश्चिदाख्यान में मृगरूप से समागत विपश्चित् को देखकर श्रीवसिष्ठजी ने यही विचार किया था कि जिस व्यक्ति का जो स्वरूप उपास्यार्थ अच्छा लगे, उसका कल्याण उसके ही द्वारा सुगम होता है। यह समझकर अनेकों जन्म के पहले अग्नि की उपासना करने वाले मृगरूप विपश्चित के सामने अपने योगबल से उन्होंने अग्नि का प्राकट्य किया।

【 शेष आगे के ब्लाग में 】

 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※
 🌹۞☀∥ राधेकृष्ण: शरणम् ∥☀۞🌹
 ※❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖※

  🌹: कृष्णा : श्री राधा प्रेमी : 🌹        
 https://www.facebook.com/shriradhapremi/

🌹 धार्मिक पोस्ट पाने या हमारे सत्संग में सामिल होने के लिए हमें श्री "राधे राधे"... शेयर करें 💐
 : मोबाइल नम्बर .9009290042 :

※══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══※

टिप्पणियाँ