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  🌹🌟 राधे नाम संग हरि बोल 🌟🌹
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  🌹🔱 💠 भक्ति ⚜ सुधा 💠 🔱🌹

【 गत ब्लॉग से आगे 】

🌟 संकल्पबल :

विचारों से समय असावधान रहता है। विचार से क्या होता है? बुरा कर्म न करुँगा, उसी त्याग की मैंने प्रतिज्ञा की है, इस तरह अपने को धोखा देकर विचार के रस का अनुभव करता है वह कभी भी व्यसन से आत्मत्राण नहीं कर सकता है। इसीलिये बुद्धिमान पुरुष को चाहिये कि वह किसी तरह बुरे विचारों को हटाये।
जिस समय बुरे विचार आने लगें, उस समय अन्यमनस्क होने का प्रयत्न करे। भगवद्धयान से, मन्त्र-जप से, श्रवण से, सत्संग से बुरे विचारों की धारा को तोड़ देनी चाहिये। भले ही उपन्यास, नाटकों, समाचार-पत्रों को पढ़ना पढ़े, परन्तु बुरे विचारों की धारा अवश्य तोड़नी चाहिये। इसी तरह अच्छे कर्मों के लिये पहले अच्छे विचारों को लाना चाहिये। इसीलिये अच्छे शास्त्रों का अभ्यास, अच्छे पुरुषों का संग करने और पवित्र वातावरण में रहने से अच्छे विचार बनते हैं, बुरे विचार और बुरे-बुरे कर्म छूट जाते हैं।

एकाएक मन का संकल्प-विकल्प से रहित होना असंभव है, अतः तदर्थ प्रयत्न व्यर्थ है। जैसे भाद्रपद में सिन्ध, शतद्रु, गंगा आदि नदियों का वेग रोककर उनके उद्गम स्थान में लौटकर उन्हे सुखा देना असंभाव है, परन्तु उनकी धाराओं को मुँह फेरकर उन्हे छिन्न-भिन्न कर सुखाना संभव है इसी तरह मन के संकल्पों को एकदम रोक देना असंभव है, परन्तु बुरे विचारों को रोककर, सात्विक विचारों की धाराओं को चलाकर, सात्विक वृत्तियों से तामस वृत्तियों को काटकर, शनैः-शनैः अन्तरंग सुक्ष्म सात्विक वृत्तियों से स्थूल बहिरंग सात्विक वृत्तियों को भी काटकर निर्वृत्तिकता सम्पादन की जा सकती है।

वैदिक शास्त्रों में बालकों को विचारों को सँभालने का बड़ा ध्यान रखा गया है। स्त्रियों और बालको के निर्मल कोमल पवित्र अन्तःकरणों में पहले से ही जो बातें अंकित हो जाती हैं, वे ही सदा काम आती हैं। चित्त या अन्तःकरण यदि अद्भुत लाक्षा (लाख) के समान कठोर होता है, तो उसमें किसी भी आचरण या उपदेश का प्रभाव नहीं पड़ता, और जब वह द्रुत लाक्षा के समान कोमल रहता है तो लाक्षा पर मुहर के अक्षरों के समान निर्मल कोमल पवित्र अन्तःकरण पर उत्तम आचरणों और उपदेशों से प्रभावित होता है। पहले से ही बुरे संगों और ग्रन्थों से बालको के हृदय में कूड़ा-करकट का भरा जाना अत्यन्त हानिकारक है। इसीलिये अच्छे पुरुषों का संग तथा शास्त्रों के अभ्यास में ही उन्हे लगाना अच्छा है।

【 शेष आगे के ब्लॉग में 】

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